“क्या मैं एक अच्छी माँ हूँ?”
यह सवाल आज हर उस महिला के मन में कौंधता है जो ऑफिस और घर की दोहरी ज़िम्मेदारी निभा रही है। सुबह अलार्म की आवाज़ से लेकर रात को थककर सोने तक, एक वर्किंग मदर का दिन किसी मैराथन से कम नहीं होता।
लेकिन इस भागदौड़ के बीच जो चीज़ सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह है ‘मॉम गिल्ट’ (Mom Guilt)।
जब बच्चा रोता है और आपको मीटिंग के लिए निकलना पड़ता है, या जब आप ऑफिस में होती हैं और स्कूल का कोई फंक्शन मिस हो जाता है—तो दिल में एक अजीब-सी कसक और अपराधबोध (Guilt) घर कर जाता है। यह गिल्ट धीरे-धीरे आपकी मानसिक शांति, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता तीनों को प्रभावित करने लगता है।
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अधिकतर महिलाएं मदरहुड और प्रोफेशनल लाइफ के बीच खुद को कहीं अटका हुआ महसूस करती हैं।
लेकिन अच्छी खबर यह है कि इस ‘मॉम गिल्ट’ के चक्रव्यूह से बाहर निकलना संभव है—और वह भी बिना खुद को तोड़े।
समाज ने माँ की एक ऐसी छवि गढ़ दी है जो सब कुछ परफेक्ट करती है—
घर भी चमकता है, ऑफिस में प्रेज़ेंटेशन भी टॉप होता है और बच्चे के टिफिन में हर दिन नई डिश भी।
सच यह है कि ‘परफेक्ट माँ’ जैसा कुछ होता ही नहीं।
सलाह:
अपनी सीमाओं को पहचानें। अगर किसी दिन आप थक गई हैं और डिनर में सिर्फ खिचड़ी बनी है, तो इसमें कोई अपराध नहीं।
याद रखें—थकी हुई परफेक्ट माँ से बेहतर है एक शांत और मौजूद माँ।
अक्सर वर्किंग मदर्स सोचती हैं कि वे बच्चों के साथ पूरे दिन नहीं रह पातीं, इसलिए वे पीछे रह गईं।
लेकिन मनोविज्ञान कहता है—बच्चों को घंटों की मौजूदगी नहीं, दिल से जुड़ा समय चाहिए।
सलाह:
ऑफिस से घर आने के बाद पहले 15–20 मिनट बच्चे को पूरे मन से दें।
न फोन, न ऑफिस की बातें—बस आप और आपका बच्चा।
यह छोटा-सा समय बच्चे को सुरक्षा और प्यार का गहरा एहसास देता है, और आपका गिल्ट भी कम करता है।
“खाली कप से किसी को चाय नहीं पिलाई जा सकती।”
ठीक वैसे ही, अगर आप अंदर से थकी और टूटी हुई हैं, तो आप दूसरों को खुश नहीं रख पाएंगी।
वर्किंग मदर्स अक्सर खुद के लिए समय निकालने को Selfish समझ लेती हैं—जो कि सबसे बड़ी भूल है।
सलाह:
दिन में कम से कम 30 मिनट सिर्फ अपने लिए रखें—
चाहे वह चुपचाप चाय पीना हो, टहलना हो, किताब पढ़ना हो या बस खामोशी।
एक खुश माँ ही एक संतुलित घर की नींव होती है।
4. मदद माँगना कमजोरी नहीं, समझदारी हैअक्सर महिलाएं सोचती हैं कि सब कुछ अकेले संभालना ही अच्छी माँ होने की पहचान है।
लेकिन सच्चाई यह है कि मदद लेना भी आत्मनिर्भरता का ही एक रूप है।
सलाह:
घर के कामों में पार्टनर को शामिल करें, परिवार या प्रोफेशनल हेल्प लें।
जब जिम्मेदारियाँ बँटती हैं, तो बोझ हल्का होता है—और माँ खुश रहती है.
वर्किंग मदर होना कोई मजबूरी या गलती नहीं है।
आपका बच्चा आपको मेहनत करते, सपने पूरे करते और आत्मनिर्भर बनते हुए देखता है।
आप उन्हें सिखा रही हैं कि
सपने देखना गलत नहीं
मेहनत की कीमत होती है
और महिलाएं सिर्फ त्याग के लिए नहीं, नेतृत्व के लिए भी बनी हैं
आप जो कर रही हैं, वह काबिले-तारीफ है
अगली बार जब गिल्ट महसूस हो, तो आईने में देखकर खुद से कहें—
“मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे रही हूँ, और यही काफी है।”
आप सिर्फ एक कर्मचारी या सिर्फ एक माँ नहीं हैं।
आप एक ऐसी योद्धा हैं जो दो दुनियाओं को एक साथ संभाल रही हैं—और यह आसान नहीं, लेकिन बेहद साहसिक है।